गुरु पूर्णिमा पर साकार हुई गुरु-शिष्य परंपरा, कुरुक्षेत्र के बांसुरी प्रशिक्षुओं ने लिया गुरुजनों का आशीर्वाद


राजेश वर्मा। कुरुक्षेत्र भूमि

पिहोवा,

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की अनुपम मिसाल उस समय देखने को मिली, जब कुरुक्षेत्र में डॉ. मनीश कुकरेजा के मार्गदर्शन में बांसुरी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षु पटियाला स्थित अपने परम गुरु उस्ताद डॉ. मुजतबा हुसैन के निवास पर पहुँचे। श्रद्धा, समर्पण और संगीत साधना से ओत-प्रोत इस आयोजन में प्रशिक्षुओं ने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त कर नियमित रियाज़ एवं संगीत साधना का संकल्प लिया।

लगभग 15 प्रशिक्षुओं की उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में गुरु-शिष्य परंपरा के अनुरूप तिलक, कलेवा, चरण वंदना एवं गुरु-आशीर्वाद जैसी पारंपरिक रस्में श्रद्धापूर्वक संपन्न की गईं। उल्लेखनीय है कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इस प्रकार के गुरु-शिष्य मिलन समारोह का आयोजन पिछले कई वर्षों से निरंतर किया जा रहा है।

डॉ. मनीश कुकरेजा ने बताया कि उनके गुरु उस्ताद डॉ. मुजतबा हुसैन एवं गुरु माता सपना हुसैन का सपना है कि कुरुक्षेत्र में बड़ी संख्या में बांसुरी वादक तैयार हों और भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा नई पीढ़ी तक पहुँचे। इसी उद्देश्य को लेकर वे निरंतर कार्य कर रहे हैं तथा विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से अब तक लगभग 120 बच्चों को बांसुरी वादन का प्रशिक्षण दे चुके हैं।

अपने आशीर्वचन में उस्ताद डॉ. मुजतबा हुसैन ने कहा कि संगीत मानवता को जोड़ने वाली सार्वभौमिक भाषा है। इसके माध्यम से विश्व में शांति, प्रेम और सौहार्द का संदेश प्रभावी ढंग से प्रसारित किया जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को संगीत शिक्षा के लिए निरंतर प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ रिधिका, अनुपम, बलविंद्र, भक्ति, युवान, वासव, मोक्षा, तन्वी, अक्षिता, अनुकृति पांडेय, हर्षित, देवव्रत एवं दीपक द्वारा बांसुरी पर राष्ट्रगान की सामूहिक प्रस्तुति से हुआ, जिसने उपस्थित सभी को देशभक्ति के भाव से अभिभूत कर दिया। इसके पश्चात प्रोफेसर पूनम उनियाल एवं चाहत हुसैन ने भक्ति-रस से ओत-प्रोत भजनों की मधुर प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उस्ताद डॉ. मुजतबा हुसैन ने शिष्यों को बांसुरी वादन की सूक्ष्म बारीकियों से अवगत कराया तथा उनके आग्रह पर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से जुड़े मनमोहक गीतों की बांसुरी प्रस्तुति देकर सभी को भावविभोर कर दिया।

समारोह के समापन पर डॉ. मनीश कुकरेजा ने बांसुरी पर श्रृंगार रस से ओत-प्रोत मधुर धुन प्रस्तुत की। इस दौरान गुरुजनों, शिष्यों एवं उपस्थित अतिथियों ने एक-दूसरे पर पुष्पवर्षा कर प्रेम, सम्मान और आत्मीयता का भाव व्यक्त किया, जिससे पूरा वातावरण श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक आनंद से सराबोर हो उठा।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में अंशुमन का विशेष योगदान रहा, जबकि संगम शर्मा ने तबले पर उत्कृष्ट संगत कर संगीत प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावशाली बनाया।

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