अखंड रुद्राभिषेक, रुद्राभिषेक और पार्थिव पूजन का बताया महत्व
राजेश वर्मा।
पिहोवा,
संगमेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण मास के दौरान रुद्राभिषेक व अखंड रुद्राभिषेक और पार्थिव पूजन लगातार जारी है। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी और महंत विश्वनाथ गिरी के सानिध्य में मंदिर के पुरोहित कमलकांत गौतम और ब्राह्मणों द्वारा प्रतिदिन मिट्टी से पार्थिव शिवलिंग तैयार किया जा रहे हैं। जिसके बाद अगले दिन सुबह 9 बजे पूजा शुरू होती है। जो ढाई घंटे तक चलती है। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को अवगत कराया गया है कि महादेव पर अर्पित होने वाले बेलपत्र खंडित ना हों । पत्तों को अच्छी तरह धोकर साफ करके अर्पित करें। उन्होंने बताया कि पार्थिव पूजन परंपरा भगवान श्री राम के लंका पर आक्रमण के समय से चली आ रही है। रावण पर विजय प्राप्त करने से पूर्व भगवान श्रीराम ने समुद्र किनारे बालू रेत से शिवलिंग बनाकर उसका पूजन किया था।
श्रद्धालुओं से पूजा में धोती पहन कर बैठने का आग्रह
मंदिर प्रबंधन की ओर से इस पूजा में शामिल होने वाले यजमानों से आग्रह किया गया है कि पूजा के समय धोती पहन कर आएं। मंदिर सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि सनातन में धोती पहन कर पूजा करने का विशेष महत्व है। जींस आदि पहनने से पूजा में बैठने में भी असुविधा होती है। हालांकि श्रद्धालु इसके लिए बाध्य नहीं है। कपड़ों का पहनावा उनकी इच्छा पर निर्भर है। यह केवल मंदिर की तरफ से एक सुझाव है। भूषण गौतम ने कहा कि श्रावण मास के दौरानरुद्राभिषेक और अखंड रुद्राभिषेक भी जारी है। उन्होंने बताया कि अखंड रुद्राभिषेक वह होता है। जिसमें भगवान महादेव पर लगातार 24 घंटे गन्ने के रस, घी, दूध,गंगाजल आदि की पतली धार चलती रहती है। उन्होंने अखंड रुद्राभिषेक में शामिल होने वाले यजमानों से निवेदन करते हुए कहा कि वह मंदिर में24 घंटे के लिए जरूर ठहरें। क्योंकि इससे उनका ध्यान 24 घंटे के लिए महादेव के चरणों में होगा और विशेष रूप से उनकी चौकी की हाजिरी लगेगी। श्रद्धालुओं के ठहरने को वातानुकूलित कमरे भोजन आदि की व्यवस्था भी मंदिर की ओर से की गई है। सामान्य रुद्राभिषेक 30 मिनट से 1 घंटे तक होता है। जिसमें सामान्यतः 30 मिनट का समय मिलता है। इसमें शहद, घी, दूध गंगाजल, पंचामृत स्नान, नवग्रह पूजन आदि होता है । उन्होंने बताया कि इस बार दोनों नाग पंचमी सोमवार को है। श्रावण मास की शिवरात्रि भीमध्य रात्रि से शुरू हो जाएगी। कावड़ियों के जल चढ़ाने के लिए मंदिर की ओर से सभी व्यवस्था पूरी की गई है ।
